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चुनाव सामग्री से पटने लगा है बाज़ार

作者 olanna 时间 2020-02-23
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आम चुनावों के क़रीब आते ही चुनावी सामग्री की मांग धीरे धीरे बाज़ार में बढ़ने लगी है. क्या कांग्रेस, क्या भारतीय जनता पार्टी और क्या आम आदमी पार्टी. हर पार्टी के झंडे, टोपियां और बैनर बाज़ार में भरे पड़े हैं.

चुनाव की सरगर्मी तेज़ है और सभी पार्टियाँ वोटरों को लुभाने में जुटी हुई हैं. पर एक जगह ऐसी भी जहाँ नरेंद्र मोदी, राहुल गाँधी और अरविंद केजरीवाल ख़ुशी-ख़ुशी एक साथ दिख जाते हैं.

यह दिल्ली के सदर बाज़ार का इलाक़ा है. यहाँ भाजपा, कांग्रेस और आप के झंडे और बैनर एक साथ बिना किसी भेदभाव के बेचे जाते हैं.

इन दुकानों में मिलने वाली सामग्री को अफ़सर बेगम (दाँए) जैसी महिलाएँ कई दशकों से बनाती आ रहीं हैं.

मुहम्मद इदरीस बताते हैं कि अब पहले जैसा माहौल नहीं रहा क्योंकि आजकल बड़ी पार्टियाँ फ़ैक्ट्रियों से थोक भाव में चुनावी सामग्री बनवाती हैं.

मगर पप्पू भाई की दुकान में मुखौटों और टोपी की माँग बनी हुई है.

मुहम्मद आलम ने बताया की मांग घट जाने से अब उनका मन इस बिज़नेस में नहीं लगता पर और कोई काम उन्हें आता भी नहीं.

इन इलाक़ों में आज भी ज़्यादातर काम हाथ से ही होता है. यहाँ कई छोटी और बड़ी दुकानें हैं जो झंडे और अन्य चुनावी सामग्री बेचती हैं.

मक宜नपपड़जाताहै。

महिलाएँ आज भी पुरानी सिलाई मशीनों से ही ज़्यादातर काम करती है.

घंटों काम करने से चुनाव के इस मौसम मे कमाई थोड़ा बढ़ जाती है.

इन दुकानों में काम करने वाले ज़्यादातर कारीगर मुस्लिम समुदाय से आते है पर ये ख़ुशी-ख़ुशी अन्य धर्म के त्योहारों से जुड़ी चीज़ें भी बनाते हैं. बीबीसी के लिए सभी तस्वीरें अंकित पांडेय ने भेजी हैं.

चुनाव की सरगर्मी तेज़ है और सभी पार्टियाँ वोटरों को लुभाने में जुटी हुई हैं. पर एक जगह ऐसी भी जहाँ नरेंद्र मोदी, राहुल गाँधी और अरविंद केजरीवाल ख़ुशी-ख़ुशी एक साथ दिख जाते हैं.

यह दिल्ली के सदर बाज़ार का इलाक़ा है. यहाँ भाजपा, कांग्रेस और आप के झंडे और बैनर एक साथ बिना किसी भेदभाव के बेचे जाते हैं.

इन दुकानों में मिलने वाली सामग्री को अफ़सर बेगम (दाँए) जैसी महिलाएँ कई दशकों से बनाती आ रहीं हैं.

मुहम्मद इदरीस बताते हैं कि अब पहले जैसा माहौल नहीं रहा क्योंकि आजकल बड़ी पार्टियाँ फ़ैक्ट्रियों से थोक भाव में चुनावी सामग्री बनवाती हैं.

मगर पप्पू भाई की दुकान में मुखौटों और टोपी की माँग बनी हुई है.

मुहम्मद आलम ने बताया की मांग घट जाने से अब उनका मन इस बिज़नेस में नहीं लगता पर और कोई काम उन्हें आता भी नहीं.

इन इलाक़ों में आज भी ज़्यादातर काम हाथ से ही होता है. यहाँ कई छोटी और बड़ी दुकानें हैं जो झंडे और अन्य चुनावी सामग्री बेचती हैं.

मक宜नपपड़जाताहै。

महिलाएँ आज भी पुरानी सिलाई मशीनों से ही ज़्यादातर काम करती है.

घंटों काम करने से चुनाव के इस मौसम मे कमाई थोड़ा बढ़ जाती है.

इन दुकानों में काम करने वाले ज़्यादातर कारीगर मुस्लिम समुदाय से आते है पर ये ख़ुशी-ख़ुशी अन्य धर्म के त्योहारों से जुड़ी चीज़ें भी बनाते हैं. बीबीसी के लिए सभी तस्वीरें अंकित पांडेय ने भेजी हैं.